डिंडौरी विकासखंड के ग्राम रकरिया निवासी कृषक श्री राजेश मरावी ने जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मिसाल प्रस्तुत की है। कृषि विभाग की सहायक संचालक कृषि सुश्री अभिलाषा चौरसिया एवं कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कृषक के खेत का भ्रमण कर उनकी कृषि गतिविधियों का अवलोकन किया गया। कृषक का संयुक्त परिवार कृषि एवं पशुपालन से जुड़ा है, जिसमें 10 सदस्य कृषि कार्यों में सहयोग करते हैं।
श्री राजेश मरावी के पास लगभग 5 एकड़ भूमि है, जिसमें वे धान, कोदो एवं रामतिल की खेती करते हैं। रबी मौसम में गेहूं, मसूर एवं चना का उत्पादन करते हैं। खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए वे जैविक खाद के साथ जीवामृत एवं नीमास्त्र जैसे जैविक इनपुट का उपयोग कर फसल प्रबंधन करते हैं। इससे स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए खेती को अधिक प्राकृतिक एवं टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषक के पास 8 पशु हैं। पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग जैविक खाद तैयार करने के साथ कृषि कार्यों में किया जाता है। वहीं, घर में स्थापित बायोगैस संयंत्र से खाना पकाने के लिए ईंधन की आवश्यकता पूरी की जा रही है। इस प्रकार पशुपालन से प्राप्त संसाधनों का उपयोग खेत की उर्वरता बढ़ाने, जैविक खाद तैयार करने और घरेलू ईंधन की जरूरत पूरी करने में किया जा रहा है।
श्री राजेश मरावी की खेती में फसल उत्पादन, पशुपालन, जैविक खाद निर्माण और बायोगैस का समन्वित स्वरूप देखने को मिलता है। उनका यह प्रयास बताता है कि किसान उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ कृषि को अधिक टिकाऊ, संसाधन-कुशल और आत्मनिर्भर बना सकते हैं।


