मध्य प्रदेश में जंगल से निकली उपज की यात्रा को केवल ‘सरकारी खरीद’ कह देने से उसका असली ढांचा छूट जाता है। राज्य लघु वनोपज ‘व्यापार एवं विकास’ सहकारी संघ के अनुसार यह तीन स्तरों पर काम करता है: गांव के पास प्राथमिक वन उपज सहकारी समितियां, जिले में यूनियन और ऊपर राज्य संघ। प्राथमिक समितियां तेंदूपत्ता, साल बीज और कुल्लू गोंद जैसी उपज के संग्रह से जुड़ती हैं; संघ संग्रह, प्रसंस्करण और बिक्री में समन्वय करता है। वन विभाग पर उपलब्ध संस्थागत परिचय के अनुसार भोपाल का लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र 2002–03 में स्थापित हुआ। यहां उपज की जांच, प्रसंस्करण और उत्पादों की बिक्री में सहायता का काम जुड़ता है।

2025 में ग्राम सभा वाला रास्ता भी चला

पेसा नियम 2022 ने अनुसूचित क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रह और विपणन के लिए ग्राम सभा की व्यवस्था दी। राज्य की 2025–26 आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2025 में 17 जिलों की 24 जिला यूनियनों के क्षेत्र में 224 ग्राम सभाओं ने यह काम स्वयं किया। छह जिला यूनियनों की ग्राम सभाओं ने स्वयं संग्रह न करने की सहमति दी। इसका अर्थ है कि हर जगह एक जैसा मॉडल नहीं था। सहकारी संघ की पुरानी त्रिस्तरीय व्यवस्था और पेसा के तहत ग्राम सभा का निर्णय, दोनों को अलग-अलग पहचानना चाहिए।

मूल्यवर्धन में रोजगार की कड़ी

उसी आर्थिक सर्वेक्षण में भोपाल के लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र का 2024-25 राजस्व ₹21.31 करोड़ बताया गया है, जो 2023-24 में ₹17.97 करोड़ था। औषधियों के उत्पादन कार्यों से 96 श्रमिक लाभान्वित दर्ज हुए। ये पूरे राज्य के संग्राहकों की आय नहीं, एक केंद्र के राजस्व और वहां के श्रमिकों का आंकड़ा है। सहकार का उपयोगी सबक भूमिका-विभाजन में है: संग्रहकर्ता उपज जुटाता है, ग्राम सभा या प्राथमिक समिति स्थानीय निर्णय और संग्रह संभालती है, जिला यूनियन जोड़ती है और प्रसंस्करण केंद्र कच्चे माल को बिक्री योग्य उत्पाद में बदलता है। किसी भी वर्ष का लाभ जानने के लिए संग्रह दर, अंतिम बिक्री, खर्च और बोनस—चारों आंकड़े साथ पढ़ना जरूरी है।

मुख्य बातें

  • 2025 में अधिसूचित क्षेत्रों की 224 ग्राम सभाओं ने तेंदूपत्ता संग्रह और विपणन स्वयं किया।
  • राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ प्राथमिक समितियों, जिला यूनियनों और प्रसंस्करण इकाइयों वाली अलग सहकारी शृंखला है।
  • भोपाल के प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र ने 2024-25 में ₹21.31 करोड़ राजस्व और उत्पादन से जुड़े 96 श्रमिक दर्ज किए।

स्रोत और संदर्भ

  1. मध्य प्रदेश शासन · मध्य प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. मध्य प्रदेश वन विभाग / राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ · About MFP-PARC: सहकारी संरचना और प्रसंस्करण केंद्र का परिचय ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।

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